तुलसीदास का जीवन परिचय

तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी और भी कई रोचक बातें हैं जो उन्हें एक महान संत और कवि बनाती हैं: 1. रामचरितमानस की रचना: तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना वाराणसी में अस्सी घाट के पास स्थित एक छोटे से मंदिर में की थी। उन्होंने इसे आम जनता के लिए अवधी भाषा में लिखा, ताकि लोग संस्कृत न जानने पर भी भगवान राम के चरित्र को समझ सकें। यह ग्रंथ “लोकभाषा में लिखी गई पहली महाकाव्यात्मक रामकथा” माना जाता है। 2. हनुमान जी के परम भक्त: तुलसीदास को हनुमान जी की कृपा से भगवान श्रीराम का साक्षात्कार हुआ था। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने हनुमान जी की प्रेरणा से ही रामचरितमानस की रचना शुरू की थी। हनुमान चालीसा की रचना भी उन्होंने की, जो आज घर-घर में श्रद्धा से पढ़ी जाती है। 3. धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक: तुलसीदास हिंदू धर्म के महान संत होते हुए भी सभी धर्मों के प्रति आदर रखते थे। वे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता के पक्षधर थे। 4. काशी में जीवन का उत्तरार्ध: अपने जीवन का अधिकांश समय तुलसीदास जी ने काशी (वाराणसी) में बिताया। वहीं पर तुलसी घाट पर उन्होंने एक रामलीला की शुरुआत भी की थी, जो आज भी बहुत प्रसिद्ध है। 5. भाषा शैली और साहित्यिक योगदान: उनकी भाषा अत्यंत सहज, भावपूर्ण और भक्ति रस से परिपूर्ण थी। उन्होंने "राम" के माध्यम से लोगों में नैतिकता, श्रद्धा और सेवा की भावना जगाई। तुलसीदास ने हिंदी साहित्य को जनमानस के साथ जोड़ने में जो योगदान दिया, वह अतुलनीय है। 6. एक प्रसंग - ताड़का वन में राम से मिलन: ऐसा कहा जाता है कि तुलसीदास को एक बार भगवान राम ताड़का वन में बाल रूप में दर्शन दिए थे, जब वे जंगल में लकड़ियाँ बीन रहे थे। यह दर्शन उनके जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव था। अगर आप चाहें, तो मैं तुलसीदास जी के जीवन पर आधारित एक छोटी प्रेरणादायक कहानी या उनका कोई प्रसिद्ध दोहा भी समझा सकता हूँ।

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